जालसाजों ने एक जानी-मानी एनबीएफसी कंपनी हीरो फिनकॉर्प के बैंक खाते में सेंध लगाई है. जालसाजों ने एचडीएफसी बैंक में मौजूद कंपनी के कॉरपोरेट अकाउंट से करीब 12 करोड़ 84 लाख रुपये निकाल लिए. यह पूरी रकम महज कुछ ही समय के भीतर 317 अनधिकृत डिजिटल ट्रांजेक्शन करके 34 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई. बैंक के सिस्टम अलर्ट से कंपनी को इस महाघोटाले की भनक लगी. मामले की शिकायत मिलते ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने तेजी से एक्शन शुरू किया. पुलिस की टेक्निकल टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 70 लाख रुपये की रकम को होल्ड करवाकर बचा लिया. पुलिस ने इस हाईटेक फ्रॉड की पड़ताल करते हुए पांच शातिर आरोपियों को दबोच लिया है. पकड़े गए आरोपियों में एक निजी बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर भी शामिल है.
कंपनी के बैंक खाते से 317 बार में कैसे साफ हो गए करोड़ों रुपये?
जांच में सामने आया कि ठगों ने बेहद शातिराना तरीके से कॉरपोरेट इंटरनेट बैंकिंग में सेंध लगाई थी. किसी को शक न हो इसलिए पूरी रकम को एक बार में निकालने के बजाय सैकड़ों हिस्सों में बांटा गया. जालसाजों ने 317 बार डिजिटल ट्रांजेक्शन किए और रकम को 34 अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिया. कंपनी को जब तक मामले की भनक लगी तब तक बड़ा खेल हो चुका था. इसके तुरंत बाद पुलिस ने मनी ट्रेल का पीछा किया और उन बैंक खातों को फ्रीज करना शुरू किया जहां पैसा भेजा गया था.
बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर ने सिंडिकेट के लिए क्या भूमिका निभाई थी?
इस पूरे नेक्सस की जांच में जयपुर से आरबीएल बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर विकास की गिरफ्तारी हुई है. विकास पर आरोप है कि उसने कमीशन के लालच में साइबर सिंडिकेट की मदद की. उसने नमन कुमार नाम के आरोपी को यस बैंक और इंडसइंड बैंक में नए खाते खुलवाने में सीधी मदद पहुंचाई थी. इसके बाद उसने नमन को फर्जी खाते संचालित करने वाले हरमन से मिलवाया. पुलिस ने विकास के साथ नमन कुमार, अबहे कुमार सोलंकी और लवली को भी गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से चेकबुक, पांच मोबाइल फोन और फर्जी रबर स्टांप बरामद हुए हैं.
टेलीग्राम और यूएसडीटी के जरिए चीन से दुबई तक पैसा कैसे पहुंचा?
पुलिस जांच में इस नेटवर्क की सबसे सनसनीखेज कड़ी राजस्थान का रहने वाला हरमन निकला. हरमन सीधे तौर पर कई चीनी टेलीग्राम ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था और विदेशी हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहा था. वह उदयपुर के देवेंद्र सिंह चौहान के लगातार संपर्क में बना हुआ था. आरोप है कि देवेंद्र ने बैंक खातों में आई चोरी की रकम को यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी में बदल दिया. इसके बाद यह फंड विदेशों में बैठे ठगों के वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया गया. पुलिस के अनुसार सिंडिकेट से जुड़े दुबई और भारत के अन्य आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी होगी.
